आदि कवि “वाल्मीकि”

रत्नाकार से बने वाल्मीकि
ये कैसे उद्धार हुआ
भीलों में पलकर भी
ब्राह्मण सा संस्कार हुआ ।

नारद जी से मिली प्रेरणा
जीवन ये उजियार हुआ
बदली सूरत बदली सीरत
भगवान का अवतार हुआ ।

सीता जी को दिया आसरा
लव-कुश जीवन साकार हुआ
अयोध्या को मिले राजपुत्र
ये तो बडा उपकार हुआ ।

पहला संस्कृत महाकाव्य रचा
रामायण का आविर्भाव् हुआ
आदि कवि कहलाये आप
‘वाल्मीकि’ नाम सत्कार हुआ ।

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