कामदेव

हे कामदेव तुम को नमन
हे रतिपति तुम को नमन
तुम श्रृष्टि के करता हो
तुम श्रृष्टि के धर्ता हो
तुम बिन कुछ नहीं भगवन
तुम बिन सब के निर्धन मन

हे कामदेव ———————
तुम प्रेम के पुजारी हो
तुम माल्य के अधिकारी हो
तुम इन्द्रसिन्हासन रखवाले हो
तुम देवपुरुष मतवाले हो
तुम बिन कुछ नहीं भगवन
सब तन मन धन तुम को अर्पण

हे कामदेव ———————-
तुम से ही होता मिलन
दुःख जाते पल में बिसरन
रति काम का जब संगम
बच्चों की किलकारी आँगन

हे कामदेव ———————–
तुम किसी का भी धर्म डिगा दो
तुम किसी का भी मूढ़ बना दो
तुम बिन कुछ नहीं भगवन
दर्शन दे कर करो प्रसन्न

के कामदेव ———————–
तुमने बक्शा नहीं है कोई
रति तुम्हारी दशा पे रोई
शिव से तुमको श्राप मिला
भस्म हो गए मिला सिला
रति ने शिव का ध्यान किया
शिव ने फिर कल्याण किया

हे कामदेव ————————-
विश्वामित्र का संकल्प डिगाया
मेनकारुपी जाल फैलाया
कामबाण से पीड़ित कर
इन्द्र का सिंहासन बचाया
क्या नहीं किया तुमने भगवन

हे कामदेव ————————-
मनुष्य देव बन जा जाए
इसलिए हुआ तुम्हारा जन्म
हे कामदेव तुम को नमन
हे रतिपति तुम को नमन

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