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कोरोना: मानव तू नपुंसक सा हो गया

मानव तेरे अहंकार का सारा धंधा चौपट हो गया

एक वायरस के आगे आज नपुंसक सा हो गया|

क्यों इतने सारे मुखोटे आज तूने ओढ़ के रखे है

उत्तार फैंक इन सबको अब जब तू नंगा हो गया|

पद पैसा और प्रतिष्ठा नही साथ में तेरे जाएगी

क्यों इन के पीछे तू बिल्कुल पागल सा हो गया|

करुणा दया प्रेम के भाव अब तेरे मन मे नही रहे

दुनियादारी में फंसकर कितना निष्ठुर सा हो गया|

सब तेरे कर्मो की सजा है जो बोया है सो काटेगा

प्रकृति का ये अटल नियम तुझ से कैसे खो गया|

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