गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस

सब से बड़े लोकतंत्र है हम
गणतंत्र दिवस ये बता रहा ।
भिन्न संस्कृतियों की झलक
राष्ट्रीय पर्व दिखला रहा ।।

३ साल बनने में लगे थे
११४ हुई थी सभाएँ ।
३०८ सदस्य थे जिसके
ना जाने कितनी आस्थाएँ ।।

२६ जनवरी १९५० को देश
ने अपना संविधान था पाया ।
गौरवशाली क्षण थे वो
जब भारत गणतंत्र कहलाया ।।

राजपथ पर जब इसदिन
अंगड़ाई लेता है भारत ।
पूरी दुनिया बनती साक्षी
होता एक नया हस्ताक्षर ।।

राष्ट्रपति की शान निराली
प्रधानमंत्री करते अगवानी ।
अमर जवान ज्योति धधकें
राष्ट्रगान का गुंजन छलकें।।

थल नभ नौसेंना को देखो
सब अपना कौशल दिखलाती ।
प्रदेशों की मोहक झलकियाँ
भी अपना लोहा मनवाती ।।

मधुर मनोहर दिन ये प्यारा
हर साल जब आता है ।
हर भारतवासी का चेहरा
फूलो सा खिल जाता है ।।

हमें भारत पर है अभिमान
तिरंगा है हम सब की शान ।
विश्वगुरु बनना लक्ष्य है
वसुधैवक़ुटुम्बक़म पहचान ।।

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