तभी आपका होना सार्थक

तभी आपका होना सार्थक
जब औरो के काम आओ
मानव तन का लाभ तब
जब परमार्थ में लगाओ

यूँ तो हर कोई जी ही रहा
अपने अपने ही तरीकों से
असल जीना केवल जब
औरो पर जीवन लुटाओ

अपनो पर हर जीव ही
प्यार लुटाता है ख़ूब यहाँ
मतलब तो जीने का तब
गैरो पर प्यार बरसाओ

यूँ ही भटकते रहे बाहर
अपने को पहचाना नही
लगने लगेंगे अपने सब
जरा सा भीतर आओ

उस दिन जीवन तुम्हारा
पूरा सार्थक हो जाएगा
अथाह प्रेम से तुम जब
अपने को उमड़ता पाओ

-डॉ मुकेश अग्रवाल

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