दिल में अपने बसाये हुए है

हर दम तेरा ख्याल बनाये हुए हूँ
तुम्हे दिल में अपने बसाये हुए हूँ
महफ़िल में यूँ तो हँसी बहुत है
नजर सिर्फ तुम पर लगाये हुए हूँ

दिन गुजर जाता है तुम्हे देखते हुए
पर रातों की नींद उडाये हुए हूँ
कभी तो समझोगे मेरे दिल के जज्बात
इसी उम्मीद में खुद को जगाये हुए हूँ

कब से प्रीत का सपना है मन में
अब तक उसको दबाये हुए है
मन में तुम्हारे क्या है समझा ना अब तलक
पर समझाने की धुन उठाये हुए हूँ

तुम्हारे तबस्सुम की सुर्खी की कसम
दिन रात तेरा ख्याल बनाये हुए हूँ
इन आँखों की शोखी को कब से
दिल में अपने बसाये हुए है

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