मत कर अहंकार रे मनवा

मत कर अहंकार रे मनवा तेरी हस्ती ही क्या है
समंदर के आगे अहमियत तेरी कश्ती की क्या है

एक भी तूफान ढंग का कभी झेल नही पाएगा
अम्फान ने दिखा दिया तेरी ताकत ही क्या है

बहुत तूने अब तलक घमंड किया है अपने पर
कोरोना कहता मेरे आगे तेरी औकात ही क्या है

अरबो गैलेक्सी ब्रह्मांड में गैलेक्सी मे अरबो तारे
इस ब्रह्मण्ड के आगे बता तेरी बस्ती ही क्या है

क्यों अपने पे रीझा है तू क्या दिखाना चाहता है
जाना नही जन्ममरण तेरी काबलियत ही क्या है

जब आये आपदायें तू भीगी बिल्ली बन जाता है
प्रकृति के आगे मानव तेरी हैसियत ही क्या है

-डॉ मुकेश अग्रवाल

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