माना_अभी_अंजान_हो_तुम

इस दिल मेरे में प्राण हो तुम

अस्तित्व की पहचान हो तुम

तुम्हारे कारण मुझ में शक्ति

जीवन के भगवान हो तुम

जब भी कभी डर जाता हूँ

घोर निराशा से भर जाता हूँ

तुम ही मुझ को देते संबल

जीवन की मुस्कान हो तुम

सुख व दुःख आते हर रोज

हंसाते और रुलाते हर रोज

सम भाव मे मैं रहूँ हर वक्त

बताने वाले ध्यान हो तुम

सच मे बहुत नासमझ हूँ मैं

तुच्छ बुद्धि की उपज हूँ मैं

क्या अच्छा है क्या है बुरा

बुझाने वाले ईमान हो तुम

कोई फायदा ना उठा सके

ना कोई मुझे बहका सके

बात बात पर सतर्क मुझे

हां करने वाले ज्ञान हो तुम

ठेस मुझे है बहुत पहुँचती

जब कोई कहता है गलत

आत्मसम्मान बचाने वाले

बस मेरे अभिमान हो तुम

रास्ते से जब भटक जाता

किसी जगह अटक जाता

आते वेद और दर्शन बनके

और कभी पुराण हो तुम

मुझे किस्मत से मिले ऐसे

फूल बगिया में खिले जैसे

कई जन्मों के कोई पुण्य

जीवन के वरदान हो तुम

तुम से ही बस मेरा होना है

तुझ में ही बस मुझे खोना है

लेलो मुझ को अपनी शरण

जीवन का अरमान हो तुम

पार भी पा सका ना कोई

भेद भी लगा सका ना कोई

मेरी ज़िद है पाना तुम को

माना अभी अंजान हो तुम

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