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to the Poem |
good poem, i am not fluent in hindi but am impressed.
(Posted By:
DR. SANDHYA P J
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thiruvananthapuram
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ज्ञान और विज्ञानं का आधार है ये आँखे दुनिया में नित नए अजूबे बनवाती है यह आंखे पलके उठी तो दुनिया दिखलाती है यह आँखे पलके गिरी तो रब से मिलाती है आँखे आँखों की बातों को आँखों में रहने दो वर्ना न जाने कौन कौन से परदे उठाती हैं यह आँखें
(Posted By:
DR. RAJESH LAKHANPAUL
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mukerian
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सच में आँखे है कमाल के अन्याय को देखते पर बोल नहीं पाते,बुरी काम का साक्ष बनके भी खामोशी baite यह आँखे कमाल के है लेकिन यह आँखे नहीं तो सब कुछ अँधेरा ही अन्धेरा और जीवन अधूरा सच मुच कमाल के है आँखे.
(Posted By:
DR. (MRS.) MADHAVI RUDRAVARAM
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bangalore
)
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