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आज वतन के नाम पर

We are going to celebrate our sixty third Independence Anniversary after two days.On this great occasion, i want to share our country's scenario by mean of some poems of mine. The second one in the series is ...आज वतन के नाम पर

आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

सब चीजो पर आज देश पर सेठो का अधिकार है
भूखा रोटी को तरस रहा है क्या करे लाचार है
अनपढ़ नोट बना रहे है पढ़ा लिखा बेकार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

जात पात का ढोल बजा कर करते रोज हंगामा है
नेता लोग ही आज बने है सब के ताऊ मामा है
सत्य अहिंसा खत्म हो गई झूठो का भंडार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

चोर बाजारी लूटपाट ये छोटे छोटे काम है
कोई नहीं ये जानता होगा क्या अंजाम है
सच्चे लोग आज देश पर समझे जाते भार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

Donations के base पर आज दाखिले होते है
किताबो को लगा कर ताले चादर तान कर सोते है
इसीलिए तो कहते है पढना लिखना बेकार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

पेड़ पोधो ने भी यहाँ मनुष्यों सा जीवन पाया है
अपना अस्तित्व मिटा कर हमारा शारीर बनाया है
गाजर मूली सा काट रहे पर आज भी कुछ किरदार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

नशाखोरी ने पाँव जमा कर युवको का भविष्य बिगाड़ा है
मनुष्य शरीर शरीर न रह कर रोगों का बना अखाडा है
नशे के कारण दुःख का सागर बना सारा संसार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

नैतिक मूल्यों ने आज यहाँ अपना लबादा उतारा है
ढोंग के कपडे पहन रहा है कैसा पाँव पसारा है
उभारेगा इसे जो दोबारा वो कोन सृजन हार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

धर्म मजहब के नाम पर आज लड़ाई होती है
देख के हालत पूतो की भारत माता रोती है
धर्म की नैया डूब रही है अधर्म का हुआ प्रचार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

ज्ञान वृद्धि के साथ साथ टीवी ने चरित्र गिराया है
मनोरंजन के नाम पर भ्रम का जाल फैलाया है
लेकिन फिर भी क्यों लोगो को इस का मोह स्वीकार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

बढती जनसँख्या के कारण देश हुआ कंगाल है
इस समस्या के कारण ही जन जन हुआ बेहाल है
खाली पड़े है इसलिए अनाज के गोदाम है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

रक्षक पुलिस आज बनी है खुद जनता की भक्षक है
शांति दूत कहलवाती खुद को देती मौत की दस्तक है
आज शहर का दादा बना है वहां का थानेदार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है

रिश्वत लेना रिश्वत देना हुए आम सी बात है
उससे भी ज्यादा दे रहा जिस की जितनी औकात है
डिग्री लेकर लाइन में लगी लायकों की भरमार है
आज वतन के नाम पर होते अत्याचार है
 
Comments to the Poem
जोश रग-रग मे ह ,इस vatan के vaste .sechane ko ह ye lahu इस चमन के vaste,,aayega jo kaal mera-इस vatan के vaste,honge lakho पवन इस चमन के vaste
(Posted By: DR. PAWAN RAJYAN - jhajjar )
जब तक आप जैसे एवं डॉ लखनपाल जैसे लोग हैं आशा की किरण भुझने नहीं पायेगी.
(Posted By: DR. DEEPAK BHANOT - delhi )
बहुत खूब sirji
(Posted By: DR. ABHISHEK GOEL - ashoknagar )
i love india
(Posted By: DR. JAGTAR JHEETA - nakodar )
भारत मेरा महान था महान है महान रहेगा
कलयुग की छाया पे मत जा सत युग फिर आयेगा
आत्याचार अभी और भरने दे फिर बदलाव आएगा
जनता उठेगी हाथ में ले डंडा
आत्याचारों का झंडा फिर न फेहरा पायगे
पाप का अँधेरा छटने दे नया सवेरा आएगा
वन्दे मातरम् गायंगे पापी जेल जायेंगे
सतयुग का परचम फेह्रायेंगे
गीत ख़ुशी के गायेंगे भारत की आभा लोटएंगे
जय घोष सब को सुनायेंगे
वन्दे मातरम गायेंगे

(Posted By: DR. RAJESH LAKHANPAUL - mukerian )
बहोत खूब ,सर!ऐसा होने के बावजूद भी संसार को हमारी उन्नति से दर लगता है....अगर आपने जो कहा वो कम हो तो क्या baat है!!??
(Posted By: VAIDYA.PARESH DANGE - nashik )
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