| Comments
to the Poem |
क्या बात है सर ,एकदम कामदेवके पीछे पड़ गये?वैसे आप पर तो वह प्रसन्न दिख ही रहा है .......!! सुंदर कल्पना के लिए आपका अभिनन्दन |
(Posted By:
DR. SUDHIR BHUJBALE.
-
akola.
)
|
जब तुम क्रोध में आयो मान सम्मान सब खा जायो फिर सूझे ना मान अपमान ना रहता अपना ध्यान रति तब लगती महबूब जूते भी तब पड़ते खूब हे देव , तुम करो सब पर कृपा दया दृष्टी की करो तुम वर्षा सब मर्यादित रहे जग में आनंद प्रेम के सागर में
(Posted By:
VAIDYA MANOJ VIRMANI
-
karnal
)
|
कामदेव से उत्पन सृष्टि तुम करते प्रेम की वृष्टि तुम से उत्पन ये जग सारा कोंन कर सका तुम से किनारा तुम बिन होत ना किसीसे प्रीति जग की चले ना कोई रीति जीवन का उत्साह तुम्ही हो खुशियों की राह तुम्ही हो सही चाल - जब तुम चलते मानव को उत्साह से भरते हो जाये जीवन खुश हाल तन मन धन हो माला माल आपकी जब होती है कृपा लक्ष्मी भी तब करती धन वर्षा .........................
(Posted By:
VAIDYA MANOJ VIRMANI
-
karnal
)
|
good one and some thing different sir,,,thanks...
(Posted By:
DR. (MRS.)POOJA MISHRA
-
dhar
)
|
वाह जनाब वाह || काम देव का काम कम से कम इतनी ? आपका काम है कमाल ! ||
(Posted By:
DR. RANGAPRASAD BHAT
-
chennai
)
|
Post
your Valuable Comment |
Please
Login with User ID and Password of AyurvedaConsultants.com
to post a Comment
|
|