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भाग्य-विधाता

आवश्कताओं की पूर्ति करेगें
हम को आज अपना मत दो
नही यकीं आता अगर
राम की कसम ले लो

अधूरे मंसूबे पड़े जो तुम्हारे
हम उनको सफल बनायेगे
साथ हो गर तुम हमारे
हम अवश्य जीत जायेगे

नहीं भरेगे अपने घर को
जैसे नेता भरते है
जियेगे मरेगे तुम्हारी खातिर
वादा आज ये करते है

संस्कृति को सुदृढ़ बनाना
ही हमारा लक्ष्य होगा
नहीं कोई भी यहाँ पर
किसी दूसरे का भक्षक होगा

यही आश्वासन है हमारा तुम को
निडर हो कर आओ तुम
वोट अपना देकर हमें
भाग्य-विधाता बनाओ तुम
 
Comments to the Poem
Door Isaaron Se Baat Nahi Hoti, Aansu Bahane Se Barsaat Nahi Hoti, Ye Zindagi Khwab Nahi Haqiqat hai, kyounki Aankhe Band Karne Se Raat Nahi Hoti.
(Posted By: DR. SHRINIWAS GUJJARWAR - margao, goa )
जीना चाहते हैं मगर ज़िन्दगी रास नहीं आती! मरना चाहते हैं मगर मौत पास नहीं आती! बहुत उदास हैं हम इस ज़िन्दगी से! उनकी यादें भी तो तड़पाने से बाज़ नहीं आती!rameshdangi15@gmail.com
(Posted By: DR. RAMESH DANGI - karnal )
hi
(Posted By: DR. HEMANT M. ADERAO - nanded )
KEEP IT UP
(Posted By: VAIDYA ALOK SHARMA - delhi )
बिलकुल सही सर
(Posted By: DR. PAWAN RAJYAN - jhajjar )
बिलकुल सही सर
(Posted By: DR. (MRS.) ANAMIKA - delhi )
Well written and meaningful. keep it up.
(Posted By: DR. SANDHYA P J - thiruvananthapuram )
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