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इंतज़ार
शरारत भरी शाम आशिकाना मौसम, मनचली बहार सी छा गई, कारण क्या है, पता नहीं पर शायद, इसीलिए की मेरे यार की चिट्ठी आ गई है.....!
चिट्ठी आने से पहले दिल बेकरार था, डर था क्यों कि उसकी तरफ से, होना बस इनकार था........!
चेहरे कि ख़ुशी रुक्सत सी हो गई थी, पाकर साथ गम का आँखें सो गई थी, पराई लगने लगी थी हर चीज़, दुखी संसार बना था.........!
मौसम के जलवे रंगीन पर, मन में अँधेरा घना था, टूटी हुई सांसें, भिखरा हुआ था आलम, हर तरफ ख़ामोशी,चुभता हुआ सा मौसम.......!
तन्हाई छाई हुई थी, पुरवा चल रही थी, ठंडी ठंडी हवा में भी हवाइयां उड़ रही थी, ख़ामोशी का साथ एकदम टूट गया, पत्र आया तो एकदम अचम्भा हुई.......!
हरियाली मन में छा गई, जो चीज़ें अब तक उखड़ी थी, वो सब मन को भा गई, कुछ देर पहले जो घटा लगती चिंता थी, अब मेरे महबूब कि चिट्टी आने पर, मेरी हर धड़कन उस पर फ़िदा थी.......!!!!
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