दोस्ती

ना ही कोई छोट-बड़ाई
ना इनमे कोई ऊँच-निचाई
ना कोई भेद जात-पात का 
ये समता का रिश्ता भाई ।

ख़ुद ही बनाते हम ये रिश्ता 
ख़ुदा की इसमें ना कोई ख़ुदाई
ना ये नाता ख़ून का देख़ो
पर उससे ज़्यादा गहराई ।

इनकी सोहबत में ख़ुशी है केवल
इनके संग में मस्ती छाईं
कोई अपेक्षा नहीं यहाँ पर
ना ही है कोई चतुराई ।

मन हल्का हो जाता है 
दुःख भी बन जाता सुखदाई 
सब कुछ खोने लगता है
जब होती मित्रों से जुदाई ।।

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