अपनी हिंदी

This recently written Poem of mine is dedicated to" HINDI - DIWAS (14 Sep)" i.e Today.

हिंदी की बात ही निराली है
जो समझते है इस को
उन के मुताबिक हिंदी
सब भाषाओ से दिलवाली है
हर रिश्ते और भाव हेतु
अलग शब्द ले आती है
अंग्रेजी भाषा की तरह
चाचा,मामा,ताऊ,मौसा,फूफा
सब को अंकल नहीं कहलवाती है
अपनापन खूब है इसमें
मात्र शब्दों का जाल नहीं
समझने वाला समझ जाता है
भावनाओं का अकाल नहीं
हश्र पर जो हो रहा
देखा नहीं अब जाता है
मातृभाषा का ये अपमान
दिल बहुत दुखाता है
आओ मिल कर हिंदी दिवस पर
आज हम प्रतिज्ञा करे
इस की शान बचाने को
अपना सब कुछ अर्पण करे !!!

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