स्वस्थ चिँतन

इस मन के अन्दर जिस दिन
ईश्वर का खौफ हो जायेगा
भ्रष्ट होने की स्थिति का
उस दिन लोप हो जायेगा

कानून बना लो कितने भी तुम
नहीं रोक सकते मक्कारी
अंतर्मन को सुनलो जब
स्वस्थ चिँतन हो जायेगा

अन्दर से काले है हम
औरो को काला कहते है
जब खुद उजले हो जायेगे
कालापन नजर न आएगा

गर सच में चाहते हो परिवर्तन
हृदय को फिर साफ़ करो
सब से प्रेम गर रखोगे
जीवन मधुबन बन जायेगा

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