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दीपक रुपी घरौंडा जेसिस

मैं चाहता हूँ सूरज बन जाए,

अपनी लौ का प्रकाश हमेशा,
यूँ ही चारो और फैलाए,

युगों युगों तक नित निरंतर,
खडा रहे बन कर विद्यांचल,
लाभावंतित होता रहे समाज,
पकड़ हमेशा इसका आँचल,

अध्यक्ष _______को,
मेरी मंगल कामना है,
इनके हाथो जन कल्याण हो,
ऐसी मेरी भावना है..........!!!

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