आज का नौजवान

पिटता हुआ आता नज़र,

मौत सिर पे उठाये है
भारी होने की वजह से
वह बहुत थक जाता है

इस सुनहरे अवसर को
टालना भी नहीं चाहता
जाना भी चाहता है
पर वह बहुत घबराये है

सुंदर सुंदर कन्याओं के
मुखड़ों को वह तकता है
प्यार जताना चाहता है
पर कुछ कह नहीं पाए है

पानी सा बहता हुआ
आता उसे नज़र है
हर चीज़ पर देखो उसे
वह पैसे बहुत लुटाये है

कम्पीटीटर बन गया है
आज उसका सारा ज़माना
हर कोई उसको आज
ऊँगली पर नचाये है

परिवर्तन लाना चाहता है
पर दिखता एक अहाता है
नशाखोरी ने उसके आज
पाँव डगमगाए है

उम्मीद की चाह ने
उसकी किस्मत बिगाड़ी है
reserevation के कारण
भाग्य चक्कर खाए है

आज के नौजवान का
बस यही अफसाना है
इन दो चारो की चक्की में
गेहू का पिस्ता जाए है........!!!

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