• Home
  • My Poems
  • कास मुझे भी चश्मा होता

कास मुझे भी चश्मा होता

हालात कुछ और ही होते,

अगर मुझे भी चश्मा होता,
inteligent कहलाता मैं भी,
नींद ठाठ की सोता,

भार नहीं कंधो पर होता,
किस्मत पर भी मैं ना रोता,
आँख दिखाकर बात करता मैं,
नहीं बनता पड़ता मुझे खोता,
काश मुझे भी चश्मा होता,

चार आँखों वाला कहलाता,
कुछ लोगो को मैं ना भाता,
पर आते वो भी मेरे पास तब,
जब उसको काम कोई होता,
काश मुझे भी चस्मा होता,

पड़ना चाहे मुझे ना आता,
एक्टिंग ही चाहे दिखलाता,
इंग्लिश पेपर देख रहा होता,
अंदर से चाहे मन सोता,
काश मुझे भी चश्मा होता.......!!!

Visit fbetting.co.uk Betfair Review