अजनबी

अजनबी एक मिल गया

मुझ को यूँ चलते हुए
देखा जब मैंने उसको
पाया उसे जलते हुए
आग दोनों ही तरफ
बराबर थी लगी हुई
देखा एक दूजे को हम ने
बात आँखों में हुई
पा कर उसका इशारा
मुझ को कुछ ऐसा लगा
जैसे पास आने को
भवरें को कली ने कहा
मेरे पास जाते ही
आँखे उसकी झुक गयी
उस की इस अदा पे यारो
सांस मेरी रूक गयी
धीरे से उसने फिर
हाथ अपना आगे किया
देर न करते हुए
मैंने हाथ में ले लिया
इसके बाद क्या हुआ
मुझ को कुछ खबर नहीं
वो मेरी थी, मैं उसका था
था हम को कोई डर नहीं
दूरी उसकी मुझको
एक क्षण भी ना सुहाती थी
उसकी हर अदा पे
मेरी जान जाती थी
यही हाल उसका भी था
वो मेरे लिए ही जीती थी
मुझ को तंग करना कराना
ये ही उस की प्रीति थी
उसके साथ सफ़र मेरा
जाने कैसे कट गया
अँधेरा जो जीवन में था
वो उसके कारण मिट गया

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