महबूब कथा

मेरे महबूब को मैंने 

उसकी सुनाई जो दास्तां
कर रहा हूँ मैं उसका
आज यहाँ पर बखान

ख़ूबसूरत हो तुम भोली हो तुम
प्यारी प्यारी मिश्री की गोली हो तुम
काले काले घटाओं जैसे बाल
चाँद से चेहरे को छुपा रहे है

मोतिओं जैसे दांत तुम्हारे
सब के मन को लुभा रहे है
काली काली आँखे सुनहरी ये पलके
रिमझिम करती बिंदिया की झलके

होठों पे सुर्ख लाली का दामन
चेहरा हो जैसे कलियों का आँगन
फूलों सी हंसी तुम्हारी
बहुत प्यारी लग रही है

सुराही जैसी गर्दन धडपर
बहुत जच रही है
ये लम्बी लम्बी नाक गजब ढा रही है
हर एक को दीवाना बनाए जा रही है

गजरा जो तुम ने बालो में लगाया है
उसने तो सब के दिलों को हिलाया है
लम्बा ये कद तुम्हारा पतली पतली कमर है
छिन न जाओ मुझसे मुझे इसी बात का डर है

चाल तुम्हारी मोरनी जैसी बगुले जैसा रंग है
नाचती हो जब मदमस्त हो मटके अंग अंग है
ये मेरा भाग्य है मैंने जो तुम्हे पाया है
धन्य हुआ मेरा जीवन जो तुमने मुझे अपनाया है

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