सुबह से प्रेरणा

 

सुबह की यह ताजगी
ख़ामोशी के साथ मिल
मेरी भावनाओं को
चार चाँद लगा देती है
और में महत्वाकांक्षाओं के
धरातल पर विचरने लगता हूँ
दूब पर पड़ी शबनम से उठती
शीतल लहर
जब मेरे मन के
विचारों से टकराती है
तो मैं कवि बन जाता हूँ
प्रकृति को विषय लिए मेरा मन
मुझे कुछ लिखने को प्रेरित करता है
और शायद यही मुझे
आत्मगर्वित होने का
अहसास करता है

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