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लो पापा में आ गयी हूँ

This was the poem which I composed, when I became father for the first time and my little angel - avni was born on २० मार्च, २००१. As two of our panelists (Vaidya Manish and Dr. Milind) too have been blessed with cute siblings, so i would like to dedicate the poem to both of them.

लो पापा में आ गयी हूँ
सब का दिल बहलाने को
दुखों को दूर भागने को
और रोतों को हंसाने को
लो पापा में आ गयी हूँ

इतना प्यारा घर मिला है
आप लोगों का संग मिला है
दादा-दादी कितने प्यारे
चाचा बुआ सबसे न्यारे
स्वर्ग से सुन्दर घर अपने में
प्यार का दीप जलने को
लो पापा में आ गयी हूँ

खून से सींचा नौ महीने मुझ को
कोख में रखा , बड़ा किया
मेरी खातिर मेरी माँ ने
दुःख सहन किया फिर जन्म दिया
अपनी प्यारी सुन्दर माँ का
हर काम में हाथ बटाने को
लो पापा में आ गयी हूँ

रक्षा बंधन जब आएगा
हर चेहरा खिल जाएगा
अपने प्यारे सत्यम भैया
को मैं राखी बाधूंगी
छोटा सा फिर तिलक लगा कर
अपनी रक्षा करवाने को
लो पापा में आ गयी हूँ

बड़ी बुआ जब आएगी
खूब मजा तब आएगा
मिशु दीदी से खेलूंगी
समय वहीँ थम जाएगा
प्यारे प्यारे फूफा जी की
गोद में चढ़ जाने को
लो पापा में आ गयी हूँ

छुट्टियों में नाना के घर
जा कर मौज मनाऊंगी
केशव भैया से खेलूंगी
मामा को घोडा बनाऊँगी
मौसी के कान पकड़ने को
नानी संग मंदिर जाने को
लो पापा में आ गयी हूँ

आशा की एक ज्योति ले कर
नयनो से दो मोती ले कर
इस धरती मां (अवनि) की गोद में
ये जीवन बिताने को
लो पापा में आ गयी हूँ

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