अहम

केवल अहम के कारण

रिश्तों में आती है दरार

अहंकार ही आड़े आता

जीत की करता पुकार

 

व्यक्ति जब ये ही समझे

सिर्फ मेरा पक्ष ही उत्तम

दूजे के दृष्टिकोण को वो

हमेशा बस माने अधम

 

अपने को स्थापित करने

पेश करे वो तथ्य भ्रामक

सारहीन बातों को रखता

ओर हो जाता आक्रामक

 

अपनी गलती को मानना

लगता उस को छोटापन

अहंकार बचाने को अपने

काम लाता हर संसाधन

 

सिर्फ एक मकसद होता

किसी तरफ बाजी मारू

साम दाम दंड भेद सहित

मात्र अपना अहम तारू

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डॉ मुकेश अग्रवाल

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